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रविवार, 20 जुलाई 2014
How to Become Chartered Accountant in Hindi - career
How to Become Chartered Accountant in Hindi -------------- CA कैसे करें
चार्टर्ड एकाउंटेंसी कोर्स (CA Course):-
चार्टर्ड एकाउंटेंसी कोर्स को पूरा कर लेने वाले व्यक्ति को चार्टर्ड अकाउंटेंट या C.A. कहते है| चार्टर्ड एकाउंटेंसी कोर्स वाणिज्य क्षेत्र का महत्वपूर्ण एंव उच्च स्तर का कोर्स है| यह कोर्स किसी विश्वविध्यालय द्वारा नहीं कराया जाता बल्कि पूरे भारत में इसके लिए एक ही संस्थान “इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (Institute of Chartered Accountants of India – ICAI)” है| यह कोर्स मुख्य रूप से लेखांकन(Accounting), ऑडिट(लेखा पुस्तकों की जाँच), कर-कानून(Tax Laws), कम्पनी एंव अन्य वाणिज्यक कानून (Corporate and other Commercial Laws), लागत लेखांकन(Cost Accounting) एंव वितीय प्रबंधन(Financial Management) आदि विषयों पर केन्द्रित है| यह स्वतंत्र कोर्स है एंव विद्यार्थी चाहे तो इसे स्वंय अध्ययन कर सकता है अथवा चाहे तो प्राइवेट कोचिंग ज्वाइन कर सकता है|
माध्यम (Medium):- इस कोर्स को अंग्रेजी (English) माध्यम अथवा हिंदी माध्यम किसी भी माध्यम में किया जा सकता है| इस बात से गुणवता एंव स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कोर्स को हिंदी में करते हो या अंग्रेजी में|
उतीर्ण योग्यताएं (Passing Criteria):- CA कोर्स का कोई भी एग्जाम उतीर्ण करने के लिए प्रत्येक Group में 50 प्रतिशत कुल औसत अंक लाना आवश्यक है| .....................................................................................................................................Read more only at www.happyhindi.com
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MAT (Management Aptitude Test) से संवारें अपना करियर – How to Get Admission in MBA Through MAT - Career articles in hindi
Management Aptitude Test (MAT):-
मैट प्रबंधन (Management) क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा है| ज्यादातर मैनेजमेंट संस्थान में, मैनेजमेंट से जुड़े कोर्सेस में प्रवेश मैट के स्कोर के आधार पर ही किया जाता है| MAT, भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा है जिसे ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) द्वारा वर्ष में चार बार आयोजित करवाया जाता है| यह सामान्यतः फ़रवरी, मई, सितम्बर, और दिसम्बर में आयोजित करवाई जाती है|परीक्षा माध्यम (MAT- Mode of Test):-
परीक्षा को दो तरह से दिया जा सकता है| MAT परीक्षा के लिए विद्यार्थी या तो पेपर बेस्ड परीक्षा का विकल्प चुन सकता है अथवा वह ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड विकल्प भी चुन सकता है|
कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा एंव पेपर बेस्ड परीक्षा में अंतर (Difference in computer based exam and paper based exam of MAT):-
कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा में प्रश्न ऑनलाइन तकनीक द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होते हैं एंव विद्यार्थी कीबोर्ड एंव माउस के प्रयोग से उन प्रश्नों का उत्तर देता है| पेपर बेस्ड परीक्षा में प्रश्न पेपर एंव उत्तर लिखने हेतु OMR answer sheet प्रदान की जाती है, जिसे pencil के प्रयोग से प्रश्नों का उतर दिया जाता है|
पात्रता अथवा योग्यता (Eligibility for MAT):-
MAT देने के लिए विद्यार्थी का कम से कम ग्रेजुएट होना आवश्यक है| Read More...................................................................only at www.happyhindi.com
Hindi Motivational and Inspirational Blog
New Beginning :- एक नयी शुरुआत – जीवन के नियम
दोस्तों जीवन में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6 महीने) ही होते है !
वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष मानकर यह आकलन किया है जिसके अनुसार हमारे पास अपने लिए मात्र 9 वर्ष व 6 महीने ही होते है| इस आकलन के अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष अन्य रोजमरा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है| इस तरह हमारे पास अपने सपनों को पूरा करने व कुछ कर दिखने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है|
“संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु समय ही है”
लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग निराशामय जिंदगी जी रहे है और वे इंतजार कर रहे होते है की उनके जीवन में कोई चमत्कार होगा, जो उनकी निराशामय जिंदगी को बदल देगा| दोस्तों वह चमत्कार आज व अभी से शुरू होगा और उस चमत्कार को करने वाले व्यक्ति आप ही है, क्योंकि उस चमत्कार को आप के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता|......................................................Read More only at www.happyhindi.com
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motivational stories in hindi
Motivational Stories In hindi - देखा देखी :- क्या आप अपने निर्णय स्वयं लेते है?
एक दिन की बात है जब मैं रेलवे स्टेशन पर खड़ा था एंव ट्रेन का इंतजार कर रहा था| मैं जिस ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था उसमें आरक्षण का कोई सिस्टम नहीं था| प्लेटफ़ॉर्म पर इतनी भीड़ थी कि यह बात स्पष्ट थी कि जगह उसी को मिलेगी जो भीड़ को पछाड़ कर सबसे पहले ट्रेन में चढ़ेगा| तभी घोषणा हुयी कि “जोधपुर को जाने वाली गाड़ी 40 मिनट की देरी से प्लेटफार्म नम्बर 1 पर आएगी|” इस घोषणा के बाद सभी यात्री आराम से बैठ गए एंव कुछ व्यक्ति नींद की मीठी मीठी झपकियाँ ले रहे थे|
कुछ ही मिनट बाद एक व्यक्ति उठकर पश्चिम की तरफ आगे बढ़ा जहाँ से ट्रेन आने वाली थी| तभी कुर्सी पर बैठे एक व्यक्ति ने अपने पास बैठे मित्र से कहा “देखो वह व्यक्ति आगे गया है, शायद ट्रेन आ गयी जल्दी चलो नहीं तो जगह नहीं मिलेगी|” ऐसा कहकर वह दोनों व्यक्ति आगे की तरफ भागे जहाँ पर ट्रेन आकर रूकती है| उन दोनों व्यक्तियों को भागते हुए देख, आराम से बैठी भीड़ में हलचल हुयी तथा भीड़ भी उठकर आगे की तरफ चली गयी जहाँ ट्रेन आकर रूकती है| भीड़ को देखकर में भी आगे बढ़ गया और आगे जाकर पता चला कि ट्रेन नहीं आयी है| सबसे पहले जो व्यक्ति आगे की तरफ गया था वो तो ऐसे ही टहल रहा था|
उस दिन मुझे यह बात समझ में आयी की,
“अगर ज्यादातर व्यक्ति एक ही दिशा में जा रहे है तो इसका मतलब यह नहीं है की वह सही दिशा में आगे बढ़ रहे है|”
उस दिन मुझे अपनी सोचने की क्षमता एंव निर्णय क्षमता पर संशय हुआ क्योंकि जब सब आगे तरफ जा रहे थे तब मैं भीड़ के साथ साथ आगे भागा और मैंने एक पल के लिए भी इस बात पर गौर नहीं किया कि अभी अभी रेलवे ने यह घोषणा की ट्रेन 40 मिनट बाद आएगी|
दोस्तों आज हमारी समस्याओं की एक वजह यह भी है कि हम स्वतंत्र रूप से नहीं एंव अपना निर्णय दूसरे व्यक्तियों द्वारा लिए गए निर्णयों के आधार पर ले लेते है| दोस्तों कोई विद्यार्थी अपने करियर के बारे में निर्णय लेता है तो वह अपना निर्णय इस आधार पर लेता है की उसके मित्रों ने कौनसा क्षेत्र चुना है अथवा उसके परिवार का सदस्य पहले से उस क्षेत्र में है या नहीं| दोस्तों विद्यार्थी को निर्णय स्वतंत्र रूप से एंव अपनी रुचि के आधार पर लेना चाहिए| जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव एंव जीवन की परिस्थितियां अलग अलग होती है उसी तरह एक ही प्रकार का निर्णय सभी व्यक्तियों के लिए सही नहीं हो सकता|
दोस्तों समाज में अन्धविश्वाश एंव कुप्रथाओं (जैसे दहेज़ प्रथा, बेटी के जन्म को अपसगुन मानना आदि) का चलन भी इसी कारण होता है की व्यक्ति स्वतंत्र रूप से नहीं सोचता एंव अपना निर्णय इस आधार पर लेता की समाज में क्या प्रचलित है न की इस आधार पर कि क्या सही है और क्या गलत?................................................read mote at www.happyhindi.com
शुक्रवार, 18 जुलाई 2014
Hindi Motivational Stories -
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दोस्तों हमने यह बात कई बार सुनी होगी कि “हमारे साथ जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसी बातों को सुन तो लेते है पर उन पर विश्वास नहीं करते|
“हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह नहीं है की उन्हें अच्छी बातों का ज्ञान नहीं है बल्कि समस्या यह है की उनको अच्छी बातों का ज्ञान होने पर वह उन बातों पर विश्वास नहीं करते|”
एक बार शहंशाह अकबर एंव बीरबल शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल ने कहा की कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है| अकबर को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|
रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|
जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और इसलिए उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है? .............................read more at our new website www.happyhindi.com
जो होता है, अच्छे के लिए होता है – Hindi Motivational Stories only at www.happyhindi.com
दोस्तों हमने यह बात कई बार सुनी होगी कि “हमारे साथ जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसी बातों को सुन तो लेते है पर उन पर विश्वास नहीं करते|
“हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह नहीं है की उन्हें अच्छी बातों का ज्ञान नहीं है बल्कि समस्या यह है की उनको अच्छी बातों का ज्ञान होने पर वह उन बातों पर विश्वास नहीं करते|”
एक बार शहंशाह अकबर एंव बीरबल शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल ने कहा की कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है| अकबर को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|
रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|
जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और इसलिए उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है? .............................read more at our new website www.happyhindi.com
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