सोमवार, 16 मार्च 2015

Chanakya Niti : चाणक्य नीति : मित्रता

Chanakya Niti




  • सफ़र पर जाते समय विद्यार्जन एंव ज्ञान मित्र है, बीमार होने पर दवा मित्र है एंव मृत्यु के बाद अर्जित पुण्य ही एकमात्र मित्र है|
चाणक्य नीति – Chanakya Niti

  • मेरा परिवार  – सत्य मेरी माता है, अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है, धर्म एंव दया मेरा मित्र है, भीतर की शांति मेरी पत्नी है एंव क्षमा मेरा पुत्र है|
चाणक्य नीति – Chanakya Niti


  • बीमारी में, विपत्तिकाल में, अकाल के समय, शत्रुओं के आक्रमण के समय, और श्मशान-भूमि में जाने के समय जो साथ रहता है, वही सच्चा मित्र है।
चाणक्य नीति – Chanakya Niti

  • ऐसे व्यक्ति जो हमारे सामने तो अच्छा व्यवहार करते है लेकिन पीठ पीछे हमारी बुराई करते है, उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह पर दूध है लेकिन अन्दर पूरा जहर भरा हुआ है इसलिए ऐसे व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए|
चाणक्य नीति – Chanakya Niti

  • दुराचारी एंव पापी व्यक्ति से मित्रता करने वाला व्यक्ति शीघ्र नष्ट हो जाता है।
 चाणक्य नीति – Chanakya Niti

  • मूर्खों के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए है, क्योंकि वे अपने कटु वचनों से हृदय को वैसे ही छलनी करते है जैसे अदृश्य काँटा पैर में चुभता है|
चाणक्य नीति – Chanakya Niti

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